उत्तर प्रदेश की थारू जनजाति बनी विकास का मॉडल—सीएम योगी का बड़ा रोल
उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति हमेशा से अपनी अनोखी
संस्कृति, प्रकृति-केन्द्रित जीवनशैली और मेहनतकश स्वभाव
के लिए जानी जाती रही है। लेकिन लंबे समय तक यह
जनजाति मुख्यधारा से दूर रही। रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और
अवसरों की कम पहुँच ने इनके विकास को सीमित कर दिया
था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
की नीतियों ने थारू समाज की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।
आज थारू जनजाति न सिर्फ राज्य में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर
भी अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
थारू जनजाति कौन है?
थारू जनजाति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों—
दुधवा, बहराइच, लखीमपुर और पिलिभीत—में निवास
करती है। घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के बीच जीवन
बिताने वाली यह जनजाति अपने खान-पान, परंपराओं
प्रकृति के प्रति सम्मान के लिए मशहूर है। लेकिन आधुनिक
सुविधाओं की कमी इनके विकास में बड़ी बाधा रही थी।
सीएम योगी की नीतियाँ—थारू समाज के लिए नए
अवसर
1. थारू हाट और ईको-टूरिज़्म मॉडल
सरकार ने थारू जनजाति की संस्कृति और जीवनशैली को
सीधे आय के साधन से जोड़ने का बड़ा कदम उठाया है।
थारू जनजाति के गांवों में ईको-टूरिज़्म मॉडल विकसित
किया गया है।
इससे पर्यटक उनके घरों में रहकर उनके खान-पान, परंपरा
और कला को समझते हैं।
इस मॉडल ने कई परिवारों को सीधा रोजगार और आमदनी
दी है।
यह पहल न सिर्फ आय बढ़ा रही है, बल्कि थारू संस्कृति की
पहचान को भी देशभर में फैला रही है।
2. महिलाओं के लिए विशेष योजनाएँ
थारू समाज की महिलाएँ बेहद मेहनती और हुनरमंद मानी
जाती हैं। योगी सरकार की नीतियों में इस कौशल को बढ़ावा
देने पर खास ध्यान दिया गया है।
सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप
से मजबूत किया जा रहा है।
परंपरागत कला, हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को बाजार
उपलब्ध कराया गया है।
“ODOP (One District One Product)” अभियान
के तहत भी थारू उत्पादों को मंच मिला है।
इससे महिलाओं को पहली बार अपने हुनर के दम पर पहचान
और स्थायी आय मिल रही है।
3. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में बदलाव
थारू जनजाति लंबे समय से शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से
दूर रही। लेकिन नए स्कूल,हॉस्टल सुविधाएँ,हेल्थ सब-सेंटर,
और जागरूकता कार्यक्रम
ने हालात को काफी हद तक बदला है।
अब थारू बच्चे पढ़ाई में आगे बढ़ रहे हैं और युवाओं के लिए
सरकारी नौकरियों का रास्ता खुल रहा है।
4. जंगल से जुड़े अधिकारों को सम्मान
थारू जनजाति का जीवन जंगलों से जुड़ा है। योगी सरकार ने
वनाधिकार कानून के तहत
भूमि अधिकार,
प्राकृतिक संसाधनों पर वैध उपयोग**,
और वनों से जुड़े रोजगार**
जैसे मुद्दों पर सकारात्मक कदम उठाए हैं।
इससे जनजाति में सुरक्षा और स्थिरता की भावना बढ़ी है।
5. सड़क और कनेक्टिविटी का विस्तार
कई थारू गांव पहले सड़क, बिजली और डिजिटल
कनेक्टिविटी से वंचित थे।
योगी सरकार के दौरान गांवों तक पक्की सड़कें,बिजली,
इंटरनेट
पहुंचाने से लोगों का जीवन आसान हुआ है और आर्थिक
गतिविधियों में तेजी आई है।
नई पहचान—नई उम्मीद
थारू जनजाति आज सिर्फ एक पारंपरिक समुदाय नहीं, बल्कि
एक मॉडल जनजाति के रूप में उभर रही है।
ईको-टूरिज़्म से बढ़ती आय
सरकार की नीतियों से बढ़ता आत्मविश्वास संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान ने उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है । सरकार के समर्थन और जनजाति के आत्मबल ने यह साबित किया है कि अगर विकास की नीतियां सही दिशा में हो तो बरसो पिछड़ा कोई भी समुदाय आगे बढ़ सकता है।


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